December 5, 2022

डीएम ने किया भिुक्षुक गृह रोशनाबाद का आकस्मिक निरीक्षण

हरिद्वार
जिलाधिकारी दीपक रावत ने बुधवार भिुक्षुक गृह रोशनाबाद का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण में भिक्षुक गृह के लिए मूलभूत आवश्यकताओं का अभाव पाये जाने तथा किशोर न्याय बोर्ड के पीठासीन अधिकारियों द्वारा दयनीय स्थिति से अवगत कराये जाने पर जिलाधिकारी ने समाज कल्याण अधिकारी हरिद्वार की लापरवाही तथा समाज कल्याण कार्यलय कर्मियों को बिना अवकाश स्वीकृति के अनुपस्थित पाये जाने के मामले में अग्रिम आदेशों तक वेतन रोकने के निर्देश दिये हैं। जिलाधिकारियों ने इन कर्मियों को निर्धारित अवधि के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत किये जाने के भी निर्देश दिये हैं।
     जिलाधिकारी दीपक रावत ने भिक्षुक गृह के निरीक्षण के दौरान पाया कि भिक्षुक गृह के टाॅयलेट और बाथरूमों में पानी की आपूर्ति ही नहीं है। जिससे यहां कार्यरत कर्मचारियों सहित बाल बन्दियों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मौके पर उपस्थित पीठासीन अधिकारी किशोर न्याय बोर्ड ने जिलाधिकारी को अवगत कराते हुए बताया कि पानी की समस्या के अलावा भिक्षुक गृह में खाली पड़े कमरों में भी ताले लगा दिये गये हैं, जबकि इन कमरों का प्रयोग शासकीय कार्यो के सम्पादन हेतु पीठासीन अधिकारियों द्वारा किये जाने की मांग भी कईं बार की गयी है।
    जिलाधिकारी के निरीक्षण के दौरान अनिल कुमार सैनी एडीओ समाज कल्याण, राजेश डंगवाल लिपिक दोनों अनुपस्थित पाये गये। जिलाधिकारी द्वारा उपस्थिति पंजिका का निरीक्षण करने पर ज्ञात हुआ कि दोनों कर्मचारी बिना किसी सूचना के अनुपस्थित चल रहे हैं। वहीं जिलाधिकारी ने भिक्षुक गृह में तैनात प्रवर सहायक विनोद तोमर एवं प्रशिक्षक ओंकारनाथ से भिक्षुक गृह में उपलब्ध बाल भिक्षुओं की संख्या की जानकारी मांगी तो दोनो कर्मचारी कोई जानकारी उन्हे नहीं दे सके। जिलाधिकारी ने समाज कल्याण अधिकारी हरिद्वार दीपराज अग्निहोत्री को भिक्षुक गृह रोशनाबाद में टाॅयलेट तथा बाथरूम में पानी की आपूर्ति शीर्ष प्राथमिकता के आधार पर करवाये जाने के निर्देशों के साथ ही उनको तथा उनके अधीनस्थ अनिल कुमार सैनी, राजेश डंगवाल, विनोद तोमर तथा ओंकारनाथ को  बरती गयी लापरवाही केे कारण बताते हुए तीन दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिये। साथ ही मुख्य कोषाधिकारी को भी निर्देशित किया कि            जिलाधिकारी के अग्रिम आदेशों तक इनका वेतन आहरित न किया जाये।
     जिलाधिकारी ने स्पष्टीकरण संतोषजनक न पाये जाने पर ही उक्त अधिकारी और कर्मचारियों के विरूद्ध विभागीय कार्रवाई किये जाने की बात कही।