December 8, 2022

उत्तराखण्ड क्रिकेट के हित में एक मंच पर आएं क्रिकेट एसोसिएशन: दिव्य नौटियाल

उत्तराखण्ड क्रिकेट के हित में एक मंच पर आएं क्रिकेट एसोसिएशन: दिव्य नौटियाल
बातचीत के लिए हमेशा खुले है हमारे दरवाजे 
 माननीय सुप्रीम कोर्ट का आभार एवं धन्यवाद
 माननीय मुख्यमंत्री जी की प्रयासों का स्वागत एवं आभार
 
उत्तराखण्ड क्रिकेट एसोसिएशन (यूसीए) के अध्यक्ष श्री रामशरण नौटियाल ने कहाकि, हम लोगों को माननीय सर्वोच्च न्यायालय में उत्तराखण्ड राज्य के खिलाड़ियों के लगातार हो रहे पलायन को रोकने के अभिप्रायः से जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। हमारी संस्था द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करके न्याय की मांग की गई। (केस संख्या- 4235/2014 है। दिनांक 29 नवंबर 2017 को अपील संख्या-1244996 आॅफ 2017) में माननीय उच्चतम न्यायायल ने उत्तराखण्ड राज्य क्रिकेट एवं खिलाड़ियों के भविष्य के मद्देनजर महत्वपूर्ण आदेश बीसीसीआई के प्रशासनिक समिति को जारी किये हैं। हम अपनी और सम्पूर्ण राज्य की ओर से माननीय सर्वोच्च न्यायालय का आभार व्यक्त करते हैं।
उत्तराखण्ड क्रिकेट एसोसिएशन (यूसीए) सचिव श्री दिव्य नौटियाल ने कहााकि, आप भली भांति अवगत हैं कि हमारी एसोसिएशन के प्रयासों से ही वर्ष 2009 में डीडीसीए के अध्यक्ष श्री अरूण जेटली जी के मार्गदर्शन में प्रदेश की सभी क्रिकेट एसोसिएशनों को एक मंच पर लाने का प्रयास हुआ था। लेकिन कुछ संस्थाओं की अडंगेबाजी के चलते ये प्रयास सफल नहीं हो पाया। पुनः वर्ष 2011 में हमारी संस्था के अथक प्रयासों के फलस्वरूप राज्य के तत्कालीन खेल मंत्री श्री खजान दास जी द्वारा एक बैठक क्रिकेट एसोसिएशनों को एक मंच पर लाने के लिये आहूत की गयी थी। जिसका कुछ क्रिकेट एसोसिएशनों ने बहिष्कार किया था।
श्री दिव्य नौटियाल ने कहाकि, हमारी एसोसिएशन के अथक प्रयासों से ही पुनः उत्तराखण्ड राज्य क्रिकेट को मान्यता दिलाने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी द्वारा आहूत बैठक 16 अक्टूबर 2017 में हम लोगों द्वारा आखिरी क्षणों तक उत्तराखण्ड राज्य के चारों क्रिकेट एसोसिएशनों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया, किन्तु अन्य एसोसिएशनों की हठधर्मिता के कारण सफलता नहीं मिल सकी। कुछ संस्थाओं ने अपने स्वार्थ के लिये सारा मामला रणजी ट्राफी की ओर मोड़ने का काम किया लेकिन राज्य हित में हर बार हम एकता के लिये तैयार रहे। हमारी संस्था माननीय मुख्यमंत्री जी एवं माननीय खेल मंत्री जी की इस पहल के लिए आभार एवं धन्यवाद करती है।
श्री दिव्य नौटियाल ने यह भी कहाकि, हमारी एसोसिएशन द्वारा समय-सयम पर पहल करके अन्य कार्यरत एसोसिएशनों को एक मंच पर लाने की कोशिश की गयी है, किन्तु कतिपय व्यक्तियों द्वारा खिलाड़ियों की भविष्य की चिंता करने की बजाय व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक हितों का लाभ देखते हुए एक मंच को साझा करने पर आपत्ति लगाई जा रही है।
श्री दिव्य नौटियाल ने कहाकि, हमारी एसोसिएशन ने बीसीसीआई से अनुरोध और मांग है कि अविलंब उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) की उत्तराखण्ड राज्य क्रिकेट में हस्तक्षेप पर रोक लगाये और यूपीसीए द्वारा गैर कानूनी तरीके से बनायें गये 12वें जोन (देहरादून जिला) को समाप्त करे ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके। तभी बीसीसीआई के समक्ष पुरजोर तरीके से यह तथ्य रखा जा सकता है कि उत्तराखण्ड राज्य के खिलाड़ियों का कोई हित नहीं हो रहा है और वे भारी उपेक्षा के शिकार हैं।
उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) द्वारा येन-केन-प्रकरेण उत्तराखण्ड राज्य क्रिकेट को बीसीसीआई से मान्यता मिलने में उत्पन्न की गयी बाधाओं के संबंध में निम्न बिंदु अवलोकनार्थ हैं-
यूपीसीए का संरक्षण और गैर कानूनी कृत्य
उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) ने बीसीसीआई के नियम-कानूनों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से पड़ोसी राज्य उत्तराखण्ड को अपनी एसोसिएशन में 12वें जोन का दर्जा दे रखा है। इससे भ्रम की स्थिति पैदा होती है कि  उत्तराखण्ड राज्य क्रिकेट की मान्यता मिल चुकी है। जबकि उत्तराखण्ड राज्य क्रिकेट की मान्यता का मामला पिछले 17 वर्षों से लंबित है। उत्तराखण्ड के खिलाड़ियों को भ्रमित कर रखा गया है।
एक राज्य दूसरे राज्य को दे सकता है मान्यता ?
यह आश्चर्यजनक है कि कोई प्रदेश (उत्तराखण्ड) किसी दूसरे प्रदेश (उत्तर प्रदेश) के क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) संस्था से कैसे पंजीकृत हो सकती है तथा बीसीसीआई से पंजीकरण होने का उल्लेख कर सकती है ? जबकि उत्तराखण्ड प्रदेश में क्रिकेट संस्था की आधिकारिक घोषणा बीसीसीआई द्वारा अभी तक नहीं की गयी है।
यूपीसीए ने उत्तराखण्ड को बना डाला 12वां जोन
नियमों के मुताबिक बीसीसीआई राज्य क्रिकेट को मान्यता प्रदान करता है। एक राज्य किसी दूसरे राज्य को मान्यता नहीं दे सकता है। लेकिन नियमों की घोर अवहेलना करते हुए उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) ने उत्तराखण्ड के एकमात्र जिले देहरादून को अपनी एसोसिएशन में 12वां जोन बीती 21 जुलाई, 2014 बनाकर नियम विरूद्ध कार्य किया गया। हमारी एसोसिएशन उत्तराखण्ड क्रिकेट एसोसिएशन (यूसीए) ने इस निर्णय का विरोध विभिन्न पत्रों के माध्यम से लगाातर बीसीसीआई और यूपीसीए से कर रही है।
यूपीसीए ने किस हैसियत से बनाया 12वां जोन?
यूपीसीए ने उत्तराखण्ड राज्य के एक जिले देहरादून की ड्रिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन को किस हैसियत से मान्यता प्रदान कर रखी है, ये पूछने वाला कोई नहीं है। इस अंधेरगर्दी, नियम की अवहलेना और मनमर्जी पर बीसीसीआई की चुप्पी भी हैरान करने वाली है।
इस संबंध में इस तथ्य का उल्लेख करना आवश्यक है कि ड्रिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन देहरादून द्वारा 71वीं जिला क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन के नाम पर भ्रम फैलाया जा रहा है। देश की आजादी को 70 वर्ष ही हुए हैं ऐसे में 71वीं जिला प्रतियोगिता समझ से परे है।
श्री पी.सी. वर्मा कैसे बने यूपीसीए के सदस्य
यूपीसीए ने उत्तराखण्ड राज्य की एक जिला एसोस्यिान को मान्यता देकर 12वां जाने तो बनाया ही वहीं, श्री पी.सी. वर्मा को यूपीसीए का सदस्य बना रखा है। श्री पी.सी. वर्मा का नाम यूपीसीए की आॅफिशियल वेबसाइट में पदाधिकारियों व सदस्यों में प्रदर्शित हो रहा है। जबकि यूपीसीए को ऐसा कोई अधिकार प्राप्त नहीं है। इस स्थिति से जस्टिस लोढा कमेटी के दिशा-निर्देशों का भी खुला उल्लंघन हुआ है। जस्टिस लोढा कमेटी के निर्दे्याों के मुताबिक 70 साल की उम्र से ज्यादा के व्यक्ति पदाधिकारी व सदस्य नहीं बन सकते। जबकि यूपीसीए ने सत्तर वर्ष से अधिक उम्र के श्री पीसी वर्मा को अपना सदस्य बना रखा है।
यूपीसीए की वर्किंग कमेटी की बैठक उत्तराखण्ड में होने का औचित्य समझ से परे
यूपीसीए की वर्किंग कमेटी की ऐन्युल जनरल मीटिंग से पूर्व आयोजित होने वाली वर्किंग कमेटी की मीटिंग का आयोजन उत्तराखण्ड राज्य में करने की परंपरा सी बनी हुई है। वर्किंग कमेटी के आयोजन की पूरी जिम्मेदारी श्री पी.सी. वर्मा को ही सौंपी जाती है। यूपी से संबंधित बैठक का आयोजन उत्तराखण्ड में किया जाना विचारणीय है।
यूपीसीए ने क्या पूरे उत्तराखण्ड को दे रखी है मान्यता
यूपीसीए ने भले ही कानून का उल्लंघन करते हुये उत्तराखण्ड राज्य के एकमात्र देहरादून जिले की जिला क्रिकेट एसोसिए्यान को मान्यता दे रखी है। पर यूपीसीए की वेबसाइट/पत्रों पर ऐसा प्रदर्शित किया जा रहा है कि उसने संपूर्ण उत्तराखण्ड को मान्यता दे रखी है। अगर ऐसा है तो क्या यूपीसीए उत्तराखण्ड राज्य के 13 जिलों से क्रिकेट प्रतियोगिताओं के आयोजन, ट्रेनिंग व अन्य गतिविधियों के लिये बीसीसीआई द्वारा आवंटित धनराशि को उत्तराखण्ड की समस्त जिला इकाईयों का प्रदान करता है। जो जांच का विषय है।
क्या यूपीसीए 12वें जोन की मानिटरिंग करता है
यूपीसीए ने चंूकि उत्तराखण्ड राज्य के एक जिले देहरादून की ड्रिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएश्रन को मान्यता देकर 12वां जोन बना रखा है। यूपीसीए ड्रिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन को विभिन्न आयु वर्ग की प्रतियोगिताओं, प्रशिक्षण कैम्पों व क्रिकेट के विकास के लिये प्रतिवर्ष रुपये पांच लाख आवटिंत करती है। ऐसे में यह सवाल अहम हो जाता है कि क्या ड्रिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन देहरादून विभिन्न आयु वर्ग की प्रतियोगिताओं, प्रशिक्षण कैम्पों का आयोजन करती भी है या नहीं? तथा यूपीसीए ड्रिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन की गतिविधियों व प्रगति रिपोर्ट लेता है या नहीं?
इस संबंध में यह भी बताना उचित होगा कि यूपीसीए उत्तराखण्ड राज्य में होने वाली विभ्न्नि क्रिकेट प्रतियोगितओं के लिये होने वाले चयन (ट्रायल) के लिए क्रिकेट एसोसिएशन आॅफ उत्तरांचल (सीएयू) से संबंद्ध खिलाड़ियों के अलावा राज्य की किसी अन्य एसोसिएशन के खिलाड़ियों को भाग लेने को अवसर ही नहीं देती है।
वहीं ड्रिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन ने अपने प्लेयर रजिस्ट्रेशन फार्म पर ”एफिलेटिड टू उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन“ लिखती है। जिससे उत्तराखण्ड राज्य के समस्त खिलाड़ियों को भ्रमित करने के साथ धन की उगाही भी करते हैं।
सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व नहीं करता यूपीसीए
यूपीसीए कहने को तो सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश के 75 जिलों का प्रतिनिधित्व करता है। सच्चाई यह है कि उत्तर प्रदेश के मात्र 34 जिलों की जिला इकाईयां ही यूपीसीए से संबंद्व है। यूपीसीए के चंद कर्ता-धर्ता अपने राज-काज चलाने के लिये अन्य जिला इकाईयों को मान्यता प्रदान नहीं करते हैं और उन्हें यूपीसीए से संबंद्ध नहीं करते हैं। तो ऐसे में जब यूपीसीए स्वयं अपने राज्य उत्तर प्रदेश का पूर्ण प्रतिनिधित्व नहीं करता है। ऐसे में यूपीसीए ने किस लालच, मजबूरी या लाभ के चलते उत्तराखण्ड राज्य के एक जिला एसोसिएशन को अपने साथ संबंद्ध कर रखा है। जिसके कारण उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखण्ड राज्य के क्रिकेटरों का हक मारा जा रहा है। यूपीसीए के आला पदाधिकारी नहीं चाहते कि कोई नया जिला उनका सदस्य बन पाये। नये सदस्यों की भर्ती पर रोक के लिये यूपीसीए ने खुद एक वाद करवाकर हाईकोर्ट से स्टे ले रखा है।
क्रिकेट एसोसिएशन आॅफ उत्तराखण्ड को उपकृत कर रहा यूपीसीए
यूपीसीए पिछले कई वर्षों से उत्तराखण्ड की मात्र एक क्रिकेट एसोसिएशन जिसका नाम क्रिकेट एसोसिएशन आॅफ उत्तराखण्ड (सीएयू) है, को नियम विरूद्व जाकर उपकृत कर रहा है। तथा प्रतिवर्ष उत्तराखण्ड में क्रिकेट खेल के आयोजन, ट्रेनिंग कैंप एवं खेल विकास के नाम पर प्रतिवर्ष रुपये पांच लाख क्रिकेट एसोसिएशन आॅफ उत्तराखण्ड को अनाधिकृत/अनियमित रूप से देना दर्शाकर सचिव से मिलीभगत करके उसका दुरूपयोग किया जाता रहा है और इसी की वजह से भी आदतन उत्तराखण्ड क्रिकेट को मान्यता मिलने में बाधा पहुंचाई जा रही है।
जस्टिस लोढा कमेटी की सिफारिशें लागू होने के बाद यूपीसीए के कहने पर सीएयू के सचिव ने अपने स्थान पर परिवार के सदस्य को सचिव पद सौंप दिया है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यूपीसीए व डीडीसीए ने हमारी संस्था उत्तराखण्ड क्रिकेट एसोसिएशन (यूसीए) को उत्तराखण्ड राज्य में क्रिकेट टूर्नामेंट व ट्रेनिंग कैंप आयोजित करवाने की अनुमति प्रदान नहीं की। वहीं दूसरी और यूपीसीए द्वारा क्रिकेट एसोसिएशन आॅफ उत्तराखण्ड (सीएयू) को कई वर्षों से उपकृत कर रहा है। यूपीसीए ने क्रिकेट एसोसिएशन आॅफ उत्तराखण्ड से संबंद्ध क्रिकेट एसोसिएशन आॅफ ड्रिस्टिक्ट, देहरादून को अपनी संस्था में 12वंा जोन बनाकर संबंद्धता व मान्यता दे रखी है। गोल्ड कप की अनुमति दे रखी है। जिसमें कई प्रकार की अनियमितताएं हैं।
अंडर 16 बालिकाओं की जोनल स्तर की क्रिकेट प्रतियोगिता
बीसीसीआई से अनुमोदित अंडर 16 बालिकाओं की जोनल स्तर की क्रिकेट प्रतियोगिता 2017-18 के लिये यूपीसीए ने देहरादून क्रिकेट एसोसिएशन को संबंधित पत्र भेजा है। जिसके तहत विभिन्न जिलों में 16 वर्ष से काम आयु के खिलाड़ियों का चयन जिला स्तर पर करके दिनांक 7 दिसंबर, 2017 तक भेजा जाना था। पत्र से यह स्पष्ट नहीं है कि खिलाड़ियों का चयन मात्र देहरादून से ही होगा या उत्तराखण्ड राज्य के 13 जिलों से होगा। संदर्भित चयन प्रक्रिया के संबंध में स्थानीय समाचार पत्रों में प्रतियोगिताओं का प्रचार-प्रसार संपूर्ण उत्तराखण्ड में नहीं हुआ। जो जांच का विषय है।
उत्तराखण्ड क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री रामशरण नौटियाल ने कहाकि, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हम स्वागत करते हुए हम आज भी राज्य हित में सभी के साथ मिल-बैठकर एक सामूहिक निर्णय के पक्ष में हैं। अन्यथा की स्थिति में प्रशासनिक कमेटी द्वारा जो भी निर्णय लिया जाता है हम उसका स्वागत करेंगे।
श्री राम शरण नौटियाल ने कहा कि, समस्त  मीडिया बंधुओं के माध्यम से हम बीसीसीआई की प्रशासनिक कमेटी से विशेष आग्रह करना चाहते हैं कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में शीघ्रातिशीघ्र  उत्तराखण्ड में क्रिकेट के हित में निर्णय लने का कार्य करेंगे।
यूसीए के सचिव श्री दिव्य नौटियाल ने अंडर-19 क्रिकेट वल्र्ड कप में उत्तराखण्ड राज्य के प्रतिभावान खिलाड़ियों श्री आर्यन जुयाल एवं श्री कमलेश नगरकोटी के चयन पर बधाई दी। उन्होंने इस अवसर पर यह भी कहाकि, अगर उत्तराखण्ड राज्य क्रिकेट को मान्यता मिल गयी होती तो ये प्रतिभावान खिलाड़ी राज्य का नाम अंतरराष्ट्रीय पटल पर चमकाते।
प्रेसवार्ता के अवसर पर उत्तराखण्ड क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री रामशरण नौटियाल, यूसीए के निदेशक श्री आलोक गर्ग, यूसीए के सचिव श्री दिव्य नौटियाल व अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।