August 16, 2022

उत्त्तरकाशी : जब जीतू बगड्वाल की जन्म स्थली बगोड़ी गांव में हुआ जीतू बगड्वाल नाटक का सजीव मंचन….

  • उत्त्तरकाशी

गढ़वाल में देवता के रूप में पूजे जाने वाले वीर भड़ जीतू बगड्वाल की जन्म स्थली बगोड़ी गांव में संवेदना समूह के कलाकारों द्वारा जीतू बगड्वाल नाटक के सजीव मंचन से ग्रामीण भाव विभोर हो गए।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए यमुनोत्री विधायक केदार सिंह रावत ने क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति एवं लोकगाथाओं के संरक्षण की दिशा में किए जा रहे
प्रयासों की सराहना की।

चिन्यालीसौड़ प्रखंड के बगोड़ी गांव में संवेदना समूह की ओर से जीतू बगड्वाल नाटक का मंचन किया गया। समूह के अध्यक्ष जयप्रकाश राणा ने बताया कि करीब दस वर्ष पूर्व गांव में विस्तृत शोध के बाद यह नाटक तैयार किया गया था।
राज्यमें विभिन्न मंचों पर इस नाटक को काफी सराहना मिली। जीतू बगड्वाल के गांव में नाटक का मंचन करने के दौरान कलाकारोंमें खासा उत्साह देखने को मिला। कलाकारों के भावपूर्ण अभिनय एवं संवादअदायगी से ग्रामीण भाव विभोर हो गए।
नाटक देखने के लिए आसपास के गांवोंसे भी बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि यमुनोत्री विधायक केदार सिंह रावत ने कहा कि गढ़वालवीरों की भूमि है। यहां वीर भड़ों की अनेक लोकगाथाएं प्रचलित हैं।

उन्होंने इनके संरक्षण की दिशा में संवेदना समूह द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

इसमौके पर प्रख्यात कथावाचक संत गोपाल मणि, राज्य मंत्री जगवीर भंडारी, प्रकाश रमोला, लोकेंद्र बिष्ट, रामसुंदर नौटियाल आदि मौजूद रहे।

आयोजन में जीतू बगड्वालमंदिर समिति के अध्यक्ष बृजमोहन बिष्ट, बलवीर बिष्ट, अर्जुन बिष्ट, कुंवर सिंह, विरेंद्र बिष्ट, देवराज बिष्ट आदि ने विशेष सहयोग किया।

यह है जीतू बगड्वाल की कहानी
लोकगाथा के अनुसार राजशाही के दौरान बगोड़ी गांव के वीर भड़ जीतू बगड्वाल ने क्षेत्र की जनता के हितों के लिए राजाज्ञा मानने से इंकार कर दिया था। वह अपने क्षेत्र में काफी लोकप्रिय था।

जब वह अपनी बहन शोभनी को लेने रैथल जाता है तब बुग्याल क्षेत्रों में आछरियां(देवलोक की अप्सराएं) उस
पर मोहित होकर उसका हरण कर लेती हैं। वह उनसे धान की रोपाई का समय लेकर गांव वापस लौटता है। यहां मल्ली के सेरा में रोपाई पूरी होते ही आछरियां
उसे हर ले जाती हैं।

मृत्यु के बाद भी जीतू बगड्वाल की आत्मा के प्रभाव
से परेशान टिहरी का राजा देव आज्ञा से जीतू की देवता के रूप में पूजा करने को कहता है। तभी से गढ़वाल के गांवों में जीतू बगड्वाल को देवता के रूप में पूजने की परंपरा चली आ रही है।
इन्होंने मंच पर जीवंत की जीतू बगड्वाल की गाथा

संवेदना समूह के डा.अजीत पंवार, राजेश जोशी, अजय नौटियाल, गंगा डोगरा, हरदेव पंवार, विपिन नेगी, संजय पंवार, मनवीर रावत, रोशनी सोनी,डा.दिवाकर बौद्ध, शिवरतन रावत, सिमरन, जयप्रकाश नौटियाल, दीप्ति, सुधा, पल्लवी, प्रियंका, नीतिका, संतोषी, यशपाल, राहुल भारती, सूर्यप्रकाश, रोशन गुसाईं
आदि कलाकारों ने इस नाटक में अहम भूमिका निभाई।