December 6, 2022

टिहरी : दीपावली में ले सकेंगे उत्तराखण्ड के पारम्परिक अनाजों के स्नैकस

  • टिहरी

इस दीपावली में ले सकेंगे उत्तराखण्ड के पारम्परिक अनाजों के स्नैकस का स्वाद उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों की कृषि हो वर्षा आधारित है ऐस में पारम्परिक अनाजों जैसे मंडुवा, झंगोरा, चौलाई रामदाना, चीणा, कौंणी आदि की खेती कर व इनके प्रसंस्कृत उत्पाद तैयार कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं।

गढ़वाल का मौसम इनकी खेती के लिए अनुकूल है, इनकी उपज भी अधिक होती है व सिंचाई की भी ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती । हमारे पूर्वज मोटे अनाजों का महत्व भली-भांति समझते थे व उनके स्वस्थ्य जीवन का राज भी वही पारम्परिक अनाज थे। समय के साथ बदली स्थितियों में अल्प प्रयुक्त फसलों का दैनिक जीवन में महत्व घटता चला गया।

फलस्वरूप आज मोटे अनाजों का सेवन पर्वतीय क्षेत्रों से लुप्त होता चला गया वहीं दूसरी ओर विदेशी कम्पनियां इन्ही अनाजों को इस्तेमाल कर लाखों व करोडों रूपये कमा रही है।
मोटे अनाजों में अधिक रेशा, खनिज लवण व जटिल कार्बोज होने के कारण इन्हें पर्वतीय क्षेत्रों के जन मानस के लिए उत्तम भोजन श्रोत माना गया है। खास करके गांव की महिलाओं के लिए जिनका जीवन परिश्रम में बीतता है। कम लागत में उगने वाले ये अनाज, गेंहू व चावल के अनुपात में सस्ते व अधिक पौष्टिक होते हैं।
 

दिन प्रतिदिन घटते कृषि उत्पादन व बढ़ती महंगाई की अवस्था में मोटे अनाज आम जनता के लिए जीवन दान साबित हो सकते हैं। प्रतिदिन दैनिक भोजन में 25-30 ग्राम रेशा सम्मिलत होना चाहिए। रेशे की यह मात्रा एक कटोरा मोटे अनाज के उत्पाद/व्यंजनों से प्राप्त होती है। मोटे अनाज उच्च रक्त चाप, मंधुमेह तथा कैंसर जैसी बीमारियों के नियंत्रण हेतु लाभदायक है।
वी.च.सिं.ग. उत्तराखणड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केन्द्र, रानीचौरी की वैज्ञानिका कीर्ति कुमारी द्वारा मोटे अनाजों के मूल्यवर्धित उत्पाद जैसे मंडुवे की बर्फी, मंडुवे की मटरी, झंगोरे के शकरपारे व नमकीन पारे, मिलट भाकरबड़ी व मिलट कोटेड मूंगफली विकसित की गई है जिनका प्रशिक्षण कृषक/कृषक महिलाओं/ग्रामीण युवाओं/प्रसार कार्यकर्ताओं को निःशुल्क दिया जाता है।
वैज्ञानिक कीर्ति कुमारी बताती हैं कि मोटे अनाजें की भारत के अन्य प्रदेशों व विदेशों में काफी मांग/डिमान्ड है। इनमें गेहूं व चावल की अपेक्षा अधिक पौष्टिक तत्व मौजूद होते हैं। बड़ी-बडी कम्पनियां अपने भ्मंसजी थ्ववके में इन्ही अनाजों को प्रयोग करती है। बाजार में जो शिशुओं के लिए भोजन ;प्दिंदज विवकेद्ध पाउडर फार्म में मिलता है या गर्भवती महिलाओं के लिए जो स्पेशल उत्पाद तैयार किए जाते है उन्हें हम लघु स्तर पर भी घर पर बना सकते हैं तथा प्रशिक्षण ले कर बडे पैमाने पर भी शुरू कर सकते हैं।

कृषि विज्ञान केन्द्र, रानीचौरी से संदीप सकलानी व कुलदीप रावत द्वारा मंडुवे की मटरी, झंगोरे के शकरपारे व नमकीन पारे, मिल्ट भाकरबडी व मिलट कोटेड मूंगफली बनाने का प्रशिक्षण लिया। इन स्नैक्स को मंडुवो का आटा झंगारे का आटा, गेंहू का आटा व मक्के के आटे से मिलाकर तैयार किया गया है। इस दिपावली में इन स्नैक्स को व्यवसायिकतौर पर बनाया जायेगा। जिस प्रकार से बाजार में हल्दीराम ब्राड के स्नैक्स उपलब्ध है उसी प्रकार इन स्नैक्स उपलब्ध है उसी प्रकार इन स्नैक्स को देवकाश आर्गेनाईजेशन द्वारा बाजार में रू. 400 से 450 प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराया जाएगा साथ ही मंडुवे की बर्फी व मंडुवे की सिंगोरी को भी उपलब्ध कराया जायेगा।
इन स्नैक्स को माननीय मुख्यमन्त्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा सराहना की गई व कहा गया की उत्तराखण्ड की संसकृति व परम्परओं को बचाने हेतु इस तरह के उत्पादों का व्यावसायिक तौर पर अति आवश्यक है जिससे महिलाओं को रोजगार के अवसर भी मिले।