December 8, 2022

उत्तरकाशी : पहाड़ सी मज़बूत हैं ये पहाड़ी महिलाएं, पारंपरिक व्यवसाय को दे रहीं बढ़ावा

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हमें किसी का रोजगार नहीं चाहिए। पहाड़ की महिलाएं किसी भी मुश्किल से लड़ सकती है। तब वह अपनी जल जंगल बचाने की हो या अपने लिए रोजगार जुटाने की।
इसकी जीती जागती उदाहरण है बॉर्डर के बगोरी गांव की जाड जाती की महिलाएं। जो की 6 माह गर्मियों में बगोरी गांव में रहकर भेड़ पालन करती हैं। उसके बाद सर्दियों में बर्फ़बारी के समय डुंडा गांव में आ जाते है।
इनके करीब 300 परिवारों का रोजगार उन से चलता है।  उसके बाद वह भेड़ो से निकाली उन से सदरी,टोपी,कोट,स्वेटर,मौजे,आदि बनाती है। जिनकी आज दील्ली सहित देश के बड़े बड़े बाजारों में मांग है। इनके कॉर्डिंग कर हाथ और मशीनों से बनाये गए कोट और सदरी एक 1000 से 2000 रूपये की बाजार में बिकती है। इनमे से कही महिलाये स्वयं अपने बनायी कपड़ो को बेचते हैं।
 कई महिलाएं समितियों के माध्यम से अपने उत्पादों को बाजार में भेजती है।
60 वर्षीया उम्रिला खम्पा बताती है कि उन का उनका पुष्तैनी कार्य है। यह काम उन्हें समाज में सशक्त करता है। वह आज भी अपने परिवार का खर्च स्वयं उठाती है। वही इनकी उन उद्योग और अन्य विभाग ख़रीद करते हैं। जिससे इनको अछि आय हो जाती है।