September 26, 2022

ऋषिकेश का एकीकृत अवस्थापना विकास परियोजना से बदलेगा स्वरूप, सीएम धामी ने की समीक्षा…

Uttarakhand News: तीर्थनगरी ऋषिकेश जल्द ही बदले हुए स्वरूप में नजर आएगी। सीएम धामी ने विकास कार्यों की समीक्षा की है। बताया जा रहा है कि ऋषिकेश को पूर्णरूप से सुविधा संपन्न बनाए जाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर ऋषिकेश नगर के एकीकृत अवस्थापना विकास परियोजना शुरू की जाने वाली है। 1600 करोड़ की इस योजना के तहत ऋषिकेश नगर में स्थानीय नागरिकों एवं पर्यटकों को बेहतर मूलभूत सुविधाए उपलब्ध होंगी। जिसके लिए सीएम ने पीएम मोदी का धन्यवाद किया है।

ये है योजना

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार ऋषिकेश में एकीकृत शहरी अवस्थापना विकास परियोजना के तहत 24 घंटे पेयजल आपूर्ति प्रणाली, पेयजल मीटर वर्षाजल प्रबंधन व बाढ़ सुरक्षा, सार्वजनिक स्वच्छता सुविधाएं, स्मार्ट शहरी स्थल (Smart Urban Spaces) परिधान व सामान कक्ष (Cloak Room), प्रतीक्षालय (Waiting Room), घाट और व्यापारिक स्थल (Vending Zone) का विकास, सड़कें और यातायात प्रबंधन भूमिगत उपयोगिता नालिका (Underground Utility Duct) नागरिक सुरक्षा और सुविधाओं हेतु विकसित एकीकृत नियंत्रण व आदेश केंद्र (Integrated Control & Command Center), स्मार्ट स्तंभ व ऊर्जा बचत हेतु उपकरणों की स्थापना, परिवहन केंद्र, बस टर्मिनल और पार्किंग इत्यादि के कार्य किए जाएंगे।

 बनाए जाएंगे एलिवेटेड पाथ

सीएम धामी (CM Pushkar Singh Dhami) ने विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड में इन्फ्रास्ट्रक्चर में अभूतपूर्व विकास हो रहा है। उन्होंने कहा  प्रत्येक वर्ष ऋषिकेश में लाखों पर्यटकों का आवागमन धार्मिक एवं साहसिक पर्यटन गतिविधियों के लिए किया जाता है. ऐसे में अतिरिक्त सुविधाओं को विकसित किए जाने के दृष्टिगत विकास कार्य किए जाने की आवश्यकता है।  ट्रैफिक जाम (Traffic Jam) से होने वाली परेशानी को कम करने के उद्देश्य से एलिवेटेड पाथ बनाए जाएंगे।

मांगी गई वित्तीय सहायता

बताया जा रहा है कि परियोजना के लिए वित्तीय मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा यूरोपीय वित्तपोषण संस्था KFW को 160 मीलियन यूरो की सहायता हेतु प्रस्ताव प्रेषित किया गया है। परियोजना की कुल लागत लगभग 200 मीलियन यूरो (लगभग 1600 करोड़ रुपए) है। परियोजना हेतु भारत सरकार व राज्य सरकार का वित्तीय अनुपात 80:20 प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि योजना के पूर्ण होने पर नागरिक जीवनशैली व जीवन योग्यता मानकों (Urban Livability Standard) में वृद्धि होगी, स्थानीयों के व्यापारिक व आजीविका स्तर में सुधार होगा, नागरिकों व पर्यटकों को बेहतर पेयजल एवं स्वच्छता सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी।

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