शिव कथा :- तृतीय दिवस.. निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि कपट छल छिद्र ना भावा”।

  1. सतीश सेठी ब्यूरो चीफ

    /सहारनपुर /सनसनीसुराग न्यूज़
    दिव्य ज्योति जागृती संस्थान
    कथा के तृतीय दिवस में परम पूजनीय गुरुदेव सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या कथा व्यास साध्वी सुश्री ब्रह्मा निष्ठा भारती जी ने बताया कि जब कोई भक्त प्रभु के चरणों में नतमस्तक होकर सच्चे मन से प्रार्थना करता है, तो भगवान् उसकी प्रार्थना को अवश्य श्रवण करते हैं और मुक्त हस्त से अपनी कृपा अपने भक्तों पर लुटाते हैं। प्रभु की कृपा को पाने के लिए कठोर व्रत,जप, तप,नियमों इत्यादि का पालन करने की आवश्यकता नहीं होती । अपतु सच्चे मन से प्रभु का स्मरण करने से और भगवान् के चरणों में सच्ची प्रीति से ही प्रभु की प्राप्ति संभव हो जाती है। तभी तो भगवान् श्री राम ने भी कहा-” निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि कपट छल छिद्र ना भावा”। आगे साध्वी जी ने बताया कि किस प्रकार से देवताओं द्वारा प्रार्थना करने पर और हिमवान् द्वारा तपस्या करने पर मां भगवती प्रसन्न होकर हिमावन के घर कन्या के रूप में जन्म लेती हैं और पूरी हिमाचल नगरी में विशाल उत्सव मनाया जाता है। साध्वी जी ने बताया कि प्राचीन काल से ही घर में कन्या की उत्पत्ति गौरव का विषय हुआ करती थी,किंतु आज के समाज में कन्या का जन्म होने पर लोग स्वयं को सौभाग्यशाली न मानकर कन्या को बोझ समझते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है आज के युग में यदि बेटी को अवसर दिया जाता है, तो वह बेटों से अधिक उन्नति को प्राप्त करती हैं और अपने माता-पिता एवं कुटुंब का शीश गर्व से ऊंचा करती है। इसीलिए सर्व श्री आशुतोष महाराज जी ने संस्थान के तत्वाधान में संतुलन नाम से एक प्रकल्प चलाया है। जिसके तहत समाज में जागरूकता लाई जाती हैकि बेटियां,बेटों से बढ़कर हैं। बेटा तो एक कुल का कल्याण करता हैं लेकिन बेटियां तो दो-दो कुलों का उद्धार करती हैं। साध्वी जी ने बताया कि यदि माता-पिता अपने बच्चों को अच्छे संस्कार प्रदान करते हैं,तो वही संतान उनकी वृद्धावस्था में उनकी सेवा करते हैं।

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