डॉ रणवीर सिंह वर्मा / सनसनी सुराग न्यूज शामली
🌺🌺🌺 “पहला सुख- निरोगी काया” जानते मानते और आवश्यक होते हुए भी आज हम कितने स्वस्थ और सुखीहैं? यह किसी से छिपा नहीं है। प्रत्येक मनुष्य जीवन पर्यन्त स्वस्थ रहना चाहता है, परन्तु चाहते मात्र से तो स्वास्थ्य प्राप्त नहीं हो पाता। इसके लिए कुछ न कुछ उपक्रम करना पड़ता है। कहा भी कहा गया है – उद्यमेन हि सिद्धयन्ति कार्याणि न मनोरथः । न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगा:। परिश्रम से ही कार्य सिद्ध होते हैं,चाहते मात्र से नहीं । जैसे सोये हुए शेर के मुख में मृग स्वयं ही प्रवेश नहीं करते हैं । अपने शिकार के लिए शेर को प्रयास करना पड़ता है।
योग मनुष्य के शरीर, मन और आत्मा को ऊर्जा और सौन्दर्य प्रदान करता है। योग जीवन का वह दर्शन है जो मनुष्य को उसकी आत्मा से जोड़ता है। योग का अर्थ ही जोड़ना है। नियमित योग हमारी एकाग्रता को बढ़ाता है, साथ ही शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को लाभ पहुँचाता है। योग सम्पूर्ण स्वास्थ्य और आन्नद प्राप्ति का सर्वोत्तम साधन है। योग से शरीर स्वस्थ बनता है । स्वस्थ व्यक्ति से स्वस्थ परिवार बनता है । स्वस्थ परिवार से स्वस्थ समाज बनता है और स्वस्थ समाज से स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण होता है । अपने स्वास्थ्य के हम स्वयं उत्तरदायी है। अच्छा स्वास्थ्य हमारा स्वभाव भी है, अधिकार भी है और कर्तव्य भी । हमें सब कुछ घर – परिवार और समाज से मिल सकता है परन्तु स्वास्थ्य की रक्षा खुद को करनी पड़ती है। योग को अपनायें । स्वयं को स्वस्थ बनायें । स्वास्थ्य की ओर पहला कदम बढायें । स्वस्थ रहें – मस्त रहें ।


