डॉ रणवीर सिंह वर्मा / सनसनी सुराग न्यूज़ जनपद शामली
आज श्रीराम शाखा पर हिंदू साम्राज्य दिनोत्सव का कार्यक्रम संपन्न हुआ।

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- ऐतिहासिक महत्व: 6 जून 1674 को महाराष्ट्र के ऐतिहासिक रायगढ़ किले में शिवाजी महाराज का भव्य राज्याभिषेक हुआ था। उन्हें ‘छत्रपति’ की उपाधि से सम्मानित किया गया, जो विदेशी आक्रांताओं के दौर में एक स्वतंत्र हिंदू संप्रभु राज्य के उदय का प्रतीक था।
- सांस्कृतिक परिवर्तन: शिवाजी महाराज ने फारसी भाषा के स्थान पर प्रशासन और राज-काज में मराठी और संस्कृत भाषा के प्रयोग को अनिवार्य किया, जिससे प्राचीन भारतीय राजनीतिक परंपराओं और संस्कृति का पुनरुद्धार हुआ।
- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में महत्व: यह दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा मनाए जाने वाले छह प्रमुख उत्सवों में से एक है। इसे हिंदू समाज में आत्मविश्वास, संगठन और राष्ट्र-गौरव के जागरण के रूप में याद किया जाता है।
- साम्राज्य दिवस (जिसे ‘हिंदू साम्राज्य दिनोत्सव’ भी कहा जाता है) हर साल ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी की तिथि को मनाया जाता है। यह ऐतिहासिक दिन 1674 में मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक और ‘हिंदवी स्वराज्य’ की स्थापना का प्रतीक है।इस दिन से जुड़े मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:ऐतिहासिक महत्व: 6 जून 1674 को महाराष्ट्र के ऐतिहासिक रायगढ़ किले में शिवाजी महाराज का भव्य राज्याभिषेक हुआ था। उन्हें ‘छत्रपति’ की उपाधि से सम्मानित किया गया, जो विदेशी आक्रांताओं के दौर में एक स्वतंत्र हिंदू संप्रभु राज्य के उदय का प्रतीक था।सांस्कृतिक परिवर्तन: शिवाजी महाराज ने फारसी भाषा के स्थान पर प्रशासन और राज-काज में मराठी और संस्कृत भाषा के प्रयोग को अनिवार्य किया, जिससे प्राचीन भारतीय राजनीतिक परंपराओं और संस्कृति का पुनरुद्धार हुआ।
- अफजल खान का वध (1659): बीजापुर के सुल्तान ने अफजल खान को शिवाजी महाराज को मारने या कैद करने के लिए भेजा था। प्रतापगढ़ में एक गुप्त मुलाकात के दौरान अफजल खान ने धोखे से शिवाजी पर वार किया। लेकिन उनके अभेद्य कवच (चिलखत) के कारण वे बच गए और उन्होंने बाघ नख (Tiger Claw) और बिछुवा नामक हथियार से अफजल खान का वध कर दिया।
- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में महत्व: यह दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा मनाए जाने वाले छह प्रमुख उत्सवों में से एक है। इसे हिंदू समाज में आत्मविश्वास, संगठन और राष्ट्र-गौरव के जागरण के रूप में याद किया जाता है।
- कार्यक्रम के प्रारंभ में
खंड शारीरिक प्रमुख श्रीमान विजय जी ने एकल गीत सुनाया
जयतु – जयतु शिवराज तुम्हारा अभिनन्दन है।
कोटि हिन्दु अधिराज तुम्हारा अभिवादन है।
जयतु – जयतु शिवराज तुम्हारा अभिनन्दन है।।
कोटि – कोटि हिन्दु जन – मन के तुम उन्नायक।
सत्य सनातन धर्म राज्य के तुम गणनायक ।।
कीर्ति आपकी रखे सुवासित धरा गगन है।
जयतु – जयतु शिवराज तुम्हारा अभिनन्दन है।।
तुम्हें गढ़ा माता जीजा ने बड़े जतन से।
कथा सुना वीरों की गीता-रामायण से।।
हिन्दु स्वराजी भाव तुम्हारे हृदयांगन हैं।
जयतु – जयतु शिवराज तुम्हारा अभिनन्दन है।।
मातृभूमि सम्मान विजय हित तेरी वेदना।
वीर मावलों के संग मिलकर करी योजना ।।
यवन मुगल संहार हिन्दु हित अंतर्मन है।
जयतु – जयतु शिवराज तुम्हारा अभिनन्दन है।।
कोटि कंठ से गूंजा जय तुलजा का नारा।
छत्रपति शिवराज बने बोलो जयकारा ।।
दिग्दिगन्त उल्लास हृदय से प्रजा मगन है।
जयतु – जयतु शिवराज तुम्हारा अभिनन्दन है।।
खंड सह व्यवस्था प्रमुख श्रीमान नीरज जी ने देश भक्ति से ओतप्रोत गीत सुनाया जिसके बोल हैं
भारत माता तेरा आँचल, हरा भरा धानी धानी मीठा मीठा चम चम करता, तेरी नदियों का पानी।
हरी हो गयी बंजर धरती, नाचे झरनो में बिजली सोना चांदी उगल रही है, तेरी नदियों का पानी।
भारत माता तेरा आँचल, हरा भरा धानी धानी मीठा मीठा चम चम करता, तेरी नदियों का पानी।
मस्त हवा जब लहराती है, दूर दूर तक पहुंचाती है तेरे ऊँचे ऊँचे पर्वत, निडर बहादुर सेनानी।
भारत माता तेरा आँचल, हरा भरा धानी धानी मीठा मीठा चम चम करता, तेरी नदियों का पानी।

