जितेंद्र चौहान / सनसनी सुराग न्यूज शामली
कांधला/शामली। जिले के थानों और पुलिस चौकियों में खड़े जब्त एवं माल-ए-मुकदमाती वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्कूटर, बाइक और कार जैसे वाहनों को मुकदमों के संबंध में पुलिस अपने कब्जे में लेती है, लेकिन समय बीतने के साथ इन वाहनों से हेडलाइट, पहिये, बैटरी, कार्ब्यूरेटर, टायर, रिम और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जे गायब होने के मामले सामने आते रहते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि चौबीस घंटे पुलिस निगरानी में रहने वाले थानों और चौकियों से इन वाहनों के पुर्जे आखिर गायब कैसे हो जाते हैं। यदि चोरी होती है तो इसके संबंध में कोई प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं कराई जाती। वहीं, जब वाहन स्वामी अदालत के आदेश पर अपना वाहन छुड़वाने पहुंचते हैं तो उन्हें वाहन क्षतिग्रस्त अवस्था में मिलता है, जिसके बाद केवल जांच कराने का आश्वासन दिया जाता है।
जिले के विभिन्न थानों में बड़ी संख्या में लावारिस एवं माल-ए-मुकदमाती वाहन वर्षों से खड़े हैं। इनमें से अधिकांश वाहन जब्त किए जाने के समय पूरी तरह सही हालत में थे, लेकिन समय के साथ उनकी स्थिति कबाड़ जैसी हो जाती है। नीलामी के दौरान भी कई लोगों ने इन वाहनों की हालत देखकर सवाल उठाए कि आखिर इनके पुर्जे कौन निकाल रहा है।
कई मामलों में स्कूटरों के टायर, रिम, स्टेपनी और लाइटें गायब मिलती हैं, जबकि मोटरसाइकिलों की हेडलाइट, टंकी और अन्य महत्वपूर्ण हिस्से तक उखाड़ लिए जाते हैं। कारों से दरवाजे, स्टीरियो सिस्टम, लाइटें और अंदरूनी फिटिंग तक गायब होने के मामले सामने आते हैं। ऐसे में वर्षों से खड़े सैकड़ों वाहनों की पहचान करना भी मुश्किल हो जाता है।
प्रमुख सवाल यह है कि थानों के सुरक्षित परिसर में खड़े वाहनों से पुर्जे गायब होने की जिम्मेदारी किसकी है। यदि चोरी हुई है तो पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई और यदि जानकारी हुई तो संबंधित मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इस संबंध में पुलिस अधिकारियों का जवाब प्रायः जांच कराने तक ही सीमित रहता है। ऐसे में आमजन के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर इन वाहनों की सुरक्षा और उनके पुर्जों की जिम्मेदारी किसकी
